हिन्दी, मराठी, गुजराती और पंजाबी में इसे काजू कहते हैं। तमिल में इसका नाम मुंदिरी परुप्पु और तेलुगु में जीडी पप्पु है। कन्नड़ में इसे गेरु बीजा और मलयालम में कासु अंडी कहा जाता है। अन्य नामों में बंगाली का हिजली बादाम और असमिया का काजू बादाम शामिल हैं।


काजू की उत्पत्ति और भारत में इसका इतिहास
काजू मूल रूप से ब्राज़ील सहित अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा है। पुर्तगाली व्यापारी 16वीं शताब्दी में गोवा के रास्ते काजू को भारत लाए। बाद में इसकी खेती भारत के अन्य क्षेत्रों में फैल गई। अंग्रेज़ी का cashew शब्द पुर्तगाली भाषा से आया है। इसकी जड़ें तुपी-गुआरानी भाषाओं के acajú और cajú नामों में हैं।
1920 और 1930 के दशकों में केरल में काजू प्रसंस्करण का विस्तार हुआ। कोल्लम प्रसंस्करण और निर्यात व्यापार का केंद्र बना। स्थानीय कारोबारियों ने निर्यात के लिए काजू भूनने और उसका खोल निकालने के कारखाने खोले। खोल निकालने, पतला छिलका हटाने और ग्रेड के अनुसार छँटाई करने वाले कर्मचारियों में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी थी। कारखानों में आयातित खोल वाले काजू का प्रसंस्करण भी होने लगा।
भारत में काजू की खेती और प्रसंस्करण कहाँ होता है?
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों में काजू की खेती होती है। काजू उगाने वाले राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गोवा, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी सीमित क्षेत्र में इसकी खेती होती है।
भारतीय प्रसंस्करण इकाइयाँ देश में उगाए गए और आयातित, दोनों तरह के खोल वाले काजू इस्तेमाल करती हैं। कारखाने का भारतीय पता इस बात का प्रमाण नहीं है कि काजू भारत में उगाया गया है। काजू किस देश में उगा और उसका प्रसंस्करण कहाँ हुआ, यह पूछें। पैकिंग किसी अन्य स्थान पर भी हो सकती है।
Goa Cashew (Kaju Or Caju) एक पंजीकृत भौगोलिक संकेतक यानी GI है। इसका पंजीकरण प्रमाणपत्र 3 अक्टूबर 2023 का है। GI किसी खास स्थान से जुड़े उत्पाद की पहचान करता है। इस पंजीकरण का क्षेत्र गोवा है। केवल गोवा में कारोबार का पता होने से इस GI नाम का इस्तेमाल करने की पात्रता साबित नहीं होती।
काजू का प्रसंस्करण
काजू के प्रसंस्करण में खाने योग्य गिरी को कठोर खोल और पतले छिलके से अलग किया जाता है। प्रसंस्करण के क्रम में ये चरण शामिल होते हैं:
- खोल निकालने की तैयारी: नमी या गर्मी देकर खोल को निकालने योग्य बनाया जाता है। भाप से उपचार में गर्मी और नमी, दोनों मिलती हैं।
- खोल निकालना: मशीनों या हाथ से कठोर खोल काटा या तोड़ा जाता है। इसके बाद भी गिरी पर पतला छिलका बना रहता है।
- सुखाना: गिरी को सुखाया जाता है, ताकि उसका पतला छिलका आसानी से उतर सके।
- छिलका उतारना: गिरी पर मौजूद पतला छिलका हटाया जाता है। इसे टेस्टा कहा जाता है।
- ग्रेड के अनुसार छँटाई: गिरी को आकार, रूप, रंग और दोषों के आधार पर अलग किया जाता है।
- पैकिंग: छँटी हुई गिरी को भंडारण और परिवहन के लिए सीलबंद पैक में रखा जाता है।
खोल और छिलका निकालते समय गिरी टूट सकती है। इससे साबुत काजू के रूप में बिकने वाला हिस्सा कम हो जाता है। काजू के व्यापार में ‘कच्चा’ शब्द के 2 अर्थ होते हैं: खोल वाला काजू और बिना भुनी हुई खाने योग्य गिरी। कच्चे नाम से बिकने वाली छिली गिरी भी खोल निकालने, सुखाने और छिलका उतारने के चरणों से गुज़रती है। प्रसंस्करण के दौरान उसे गर्मी भी दी गई हो सकती है।
नाश्ते के लिए काजू भूनते समय छिली गिरी को गर्म किया जाता है, ताकि उसका स्वाद और रंग विकसित हो। यह खोल निकालने से पहले दिए जाने वाले ताप उपचार से अलग प्रक्रिया है।
कठोर खोल में काजू खोल द्रव यानी CNSL होता है। यह द्रव त्वचा को जला सकता है या उसमें जलन पैदा कर सकता है। खाने योग्य काजू का तेल गिरी से निकलता है। खोल के द्रव का इस्तेमाल उद्योगों में होता है। इसे खाना पकाने के तेल के रूप में इस्तेमाल न करें।
साबुत काजू, दो फाड़ और टुकड़े
टूटे काजू में स्प्लिट्स, बट्स और अलग-अलग आकार के टुकड़े शामिल होते हैं।
- साबुत गिरी: ऐसा काजू जिसका घुमावदार आकार बना हुआ हो।
- स्प्लिट्स या दो फाड़ काजू: लंबाई की दिशा में दो हिस्सों में अलग हुई गिरी।
- बट्स: चौड़ाई की दिशा में टूटी गिरी, जिसमें लंबाई वाले दोनों हिस्से अभी जुड़े रहते हैं।
साबुत ग्रेड में हल्के किनारे टूटे हुए काजू भी शामिल हो सकते हैं। एसोसिएशन ऑफ फूड इंडस्ट्रीज़ (AFI) ने सितंबर 2023 में अपने काजू गिरी के विनिर्देश अपनाए थे। इनके अनुसार साबुत गिरी का अधिकतम आठवाँ हिस्सा गायब हो सकता है। इन्हीं नियमों के तहत साबुत काजू के बैच में वजन के आधार पर 10% तक टूटी गिरी या टुकड़े भी हो सकते हैं। ये अमेरिकी व्यापारिक विनिर्देश हैं; ये भारत की कानूनी सीमाएँ तय नहीं करते।
छोटे टुकड़ों की ग्रेडिंग के लिए निश्चित आकार के छेद वाली परीक्षण छलनियाँ इस्तेमाल होती हैं। CAPEX के उत्पाद विनिर्देशों में टुकड़ों के ये आकार दिए गए हैं:
- लार्ज व्हाइट पीसेज़ (LWP): सफेद गिरी के ऐसे टूटे टुकड़े जो 4.75 mm की छलनी से न निकलें।
- स्मॉल व्हाइट पीसेज़ (SWP): LWP से छोटे टुकड़े, लेकिन 2.80 mm की छलनी से न निकलें।
- बेबी बिट्स (BB): SWP से छोटे टुकड़े, लेकिन 1.70 mm की छलनी से न निकलें।
छलनी के छेद का आकार छँटाई की विधि बताता है, हर टुकड़े की निश्चित मोटाई नहीं। टुकड़ों के ग्रेड की तुलना करते समय पूछें कि किन ग्रेडिंग नियमों का पालन किया गया है। टूटी गिरी और खराब गिरी एक जैसी चीज़ नहीं हैं। आकार के साथ खराबी और नुकसान की भी जाँच करें।
काजू के ग्रेड और आकार
काजू के ग्रेड उसके आकार, रंग और गिरी के रूप को बताते हैं। ग्रेड कोड पौधे की किसी किस्म का नाम नहीं होता। आकार का कोड ताज़गी, खाद्य सुरक्षा या पोषक तत्वों की मात्रा नहीं बताता।
एक किलो में काजू की गिनती और एक गिरी का वजन
नीचे इस्तेमाल की गई तालिका के अनुसार W320 में लगभग 661–705 साबुत गिरियाँ प्रति किलो होती हैं। गणना के आधार पर एक गिरी का औसत वजन लगभग 1.42–1.51 ग्राम होता है। उतने ही वजन में W180 की गिरियाँ कम होती हैं, क्योंकि उनका औसत आकार बड़ा होता है।
CAPEX के ग्रेडिंग विनिर्देशों में W का अर्थ सफेद साबुत काजू है। संख्या एक पाउंड, यानी लगभग 454 ग्राम, में गिरी की गिनती बताती है। नीचे प्रति किलो की गिनती, प्रकाशित 454 ग्राम वाली सीमाओं से गणना करके निकाली गई है।
| ग्रेड | प्रति 454 ग्राम प्रकाशित गिनती | प्रति 1 किलो अनुमानित गिनती | एक गिरी का गणना-आधारित औसत वजन (ग्राम) |
|---|---|---|---|
| W180 | 170–180 | 374–396 | 2.52–2.67 |
| W210 | 200–210 | 441–463 | 2.16–2.27 |
| W240 | 220–240 | 485–529 | 1.89–2.06 |
| W320 | 300–320 | 661–705 | 1.42–1.51 |
| W450 | 400–450 | 881–991 | 1.01–1.14 |
| W500 | 450–500 | 991–1,101 | 0.91–1.01 |
प्रति किलो की गिनती अनुमानित रूपांतरण है, जिसे निकटतम पूर्ण गिरी तक पूर्णांकित किया गया है। औसत वजन की गणना में पूर्णांकन से पहले के आँकड़े इस्तेमाल किए गए हैं। ये रूपांतरण तय किए गए ग्रेडिंग विनिर्देश की जगह नहीं लेते और हर गिरी के वजन की गारंटी नहीं देते।
प्रति किलो गिरी की गिनती निकालने के लिए: प्रति 454 ग्राम की गिनती को 1,000 से गुणा करें, फिर 454 से भाग दें।
एक गिरी का औसत वजन निकालने के लिए: 1,000 ग्राम को एक किलो में मौजूद गिरियों की संख्या से भाग दें।
यदि किसी बैच में प्रति किलो 680 गिरियाँ हों, तो 1,000 ÷ 680 से एक गिरी का औसत वजन लगभग 1.47 ग्राम निकलता है। 100 मिठाइयों पर एक-एक गिरी लगाने में लगभग 147 ग्राम काजू लगेगा। सजावट के लिए लगने वाले वजन का अनुमान लगाने से पहले अपने बैच की कई गिरियाँ तौलें।
समान वजन में कम गिरियाँ होने का अर्थ है कि उनका औसत आकार बड़ा है। अलग-अलग विनिर्देशों में गिनती की सीमा भी अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, AFI के विनिर्देश आकार 180 के लिए प्रति पाउंड 170–180 के बजाय 140–180 गिरियों की सीमा इस्तेमाल करते हैं। केवल ग्रेड संख्या नहीं, बताई गई गिनती की सीमा की तुलना करें।
काजू की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई
काजू की ग्रेड संख्या उसकी निश्चित लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं बताती। दो बैच एक ही गिनती की सीमा में आ सकते हैं, फिर भी उनकी गिरियों के माप अलग हो सकते हैं। नमूने का माप लेने से वास्तविक आकार का अंतर समझने में मदद मिलती है।
ICAR–काजू अनुसंधान निदेशालय के 2015 के एक अध्ययन में प्रसंस्कृत गिरियों के ये औसत माप दिए गए थे:
| ग्रेड | लंबाई (mm) | चौड़ाई (mm) | मोटाई (mm) |
|---|---|---|---|
| W180 | 26.3 | 18.1 | 13.3 |
| W210 | 26.1 | 17.4 | 12.7 |
| W320 | 22.5 | 14.1 | 11.2 |
| W450 | 20.6 | 13.3 | 9.8 |
ये आँकड़े अध्ययन के उन नमूनों के हैं जिनमें शुष्क वजन के आधार पर 5% नमी थी। नमी की इस माप में पानी के वजन की तुलना सूखी गिरी के वजन से की जाती है। दिए गए माप नमूनों के औसत हैं, इन ग्रेडों की अनिवार्य सीमाएँ नहीं।
इन नमूनों में W180 और W210 की लंबाई लगभग समान थी, लेकिन चौड़ाई और मोटाई अलग थीं। ऊपर दिए गए आँकड़ों से W240 या W500 का माप तय नहीं होता। ग्रेड संख्या से माप मान लेने के बजाय बैच का नमूना जाँचें।
व्हाइट, स्कॉर्च्ड और डेज़र्ट ग्रेड
व्हाइट ग्रेड में सफेद और हल्के हाथीदाँत जैसे रंग की गिरियाँ शामिल होती हैं। स्कॉर्च्ड ग्रेड में प्रसंस्करण के दौरान गर्मी से गहरे रंग की हुई गिरियाँ आती हैं। AFI के नियमों के तहत डेज़र्ट ब्लेमिश्ड होल्स में सिकुड़ी हुई गिरियाँ और सतह पर गहरे निशान वाली गिरियाँ शामिल हो सकती हैं।
डेज़र्ट यहाँ ग्रेड का नाम है, मीठा किया गया उत्पाद नहीं। स्कॉर्च्ड एक ग्रेड बताता है, जबकि रोस्टेड यानी भुना हुआ तैयारी की विधि बताता है। ये ग्रेड शब्द फफूँद या तेल के बासीपन की जाँच की जगह नहीं लेते।
जंबो और प्रीमियम जैसे शब्द पूरा ग्रेड नहीं बताते। आकार, रंग की श्रेणी, गिरी का रूप और स्वीकार्य दोषों की तुलना करें। टूटे काजू की स्वीकार्य सीमा भी अलग हो सकती है: CAPEX के विनिर्देश सफेद साबुत काजू में 5% टूटी गिरी की अनुमति देते हैं, जबकि AFI में यह सीमा वजन के आधार पर 10% है।
कच्चे, भुने, नमकीन और स्वादयुक्त काजू
कच्चा और भुना हुआ तैयारी की विधि बताते हैं; नमकीन और स्वादयुक्त मिलाई गई सामग्री बताते हैं। भुना हुआ काजू नमकीन या स्वादयुक्त भी हो सकता है। ड्राई रोस्टिंग में भूनने के लिए अतिरिक्त तेल नहीं डाला जाता। ऑयल रोस्टिंग में काजू तेल डालकर पकाया जाता है।
स्वादयुक्त काजू में मसाले, तेल, नमक, चीनी या परत चढ़ाने वाली सामग्री हो सकती है। केवल ‘भुना हुआ’ लिखा होने से पता नहीं चलता कि उसमें और क्या मिलाया गया है। सामग्री की सूची पढ़ें और बनाने की विधि की पुष्टि करें। सादी गिरी खरीदते समय भी अतिरिक्त तेल या मसालों के लिए सामग्री की सूची देखें।
खाने में काजू का उपयोग

साबुत काजू नाश्ते, सजावट और मिठाइयों में इस्तेमाल होते हैं। बेकरी में कटे काजू केक, बिस्कुट और भरावन में डाले जाते हैं। पिसी गिरी काजू कतली का आधार बनती है और सॉस तथा ग्रेवी को गाढ़ा करती है। जिन व्यंजनों में पिसा काजू चाहिए, उनके लिए साबुत काजू के साथ टुकड़ों वाले ग्रेड की भी तुलना करें।
काजू सेब से रस, संरक्षित खाद्य पदार्थ और मादक पेय बनाए जाते हैं। गोवा की काजू फेनी में काजू सेब इस्तेमाल होता है, जबकि काजू गिरी से बनने वाले पेय में बीज का उपयोग होता है।
काजू पाउडर, पेस्ट, बटर और पेय
शुद्ध काजू पाउडर बारीक पिसी काजू गिरी से बनता है। पैक किए हुए काजू पाउडर में अतिरिक्त चीनी या दूसरी सामग्री की जाँच करें। चिकना पेस्ट बनाने के लिए देखें कि पाउडर कितना बारीक पिसा है।
काजू पेस्ट में पिसी गिरी होती है और इसमें पानी या दूसरी सामग्री भी मिलाई जा सकती है। पानी मिलाने से तैयार पेस्ट के प्रत्येक 100 ग्राम में काजू की मात्रा कम हो जाती है। पानी वाले पेस्ट को फ्रिज में रखने और पैक खोलने के बाद जल्दी इस्तेमाल करने की आवश्यकता हो सकती है। सूखी गिरी के भंडारण निर्देशों के बजाय पेस्ट के लेबल का पालन करें।
काजू बटर काजू पीसकर बनाया गया स्प्रेड है। कुछ उत्पादों में केवल काजू होता है; अन्य में तेल, नमक या चीनी भी हो सकती है। मिलाई गई सामग्री पहचानने के लिए सामग्री की सूची पढ़ें।
काजू पेय में पानी और काजू होते हैं। उनकी विधि उत्पाद के अनुसार बदलती है। पूरे काजू की गिरी वाले पोषण आँकड़ों के बजाय तैयार पेय के पोषण लेबल का इस्तेमाल करें।
काजू का पोषण और स्वास्थ्य
प्रति 100 ग्राम और 30 ग्राम काजू में पोषण
काजू के ये पोषण आँकड़े इंडियन फूड कंपोज़िशन टेबल्स 2017 से लिए गए हैं। 30 ग्राम वाला कॉलम एक छोटी मात्रा में पोषक तत्वों की गणना दिखाता है।
| पोषक तत्व | प्रति 100 ग्राम | प्रति 30 ग्राम |
|---|---|---|
| ऊर्जा (किलो कैलोरी) | 583 | 175 |
| प्रोटीन (ग्राम) | 18.8 | 5.6 |
| कुल वसा (ग्राम) | 45.2 | 13.6 |
| संतृप्त वसा (ग्राम) | 7.8 | 2.3 |
| उपलब्ध कार्बोहाइड्रेट (ग्राम) | 25.5 | 7.6 |
| आहारीय रेशा (ग्राम) | 3.9 | 1.2 |
| मैग्नीशियम (मिलीग्राम) | 307 | 92 |
| आयरन (मिलीग्राम) | 6.0 | 1.8 |
| ज़िंक (मिलीग्राम) | 5.3 | 1.6 |
| कॉपर (मिलीग्राम) | 2.23 | 0.67 |
ये मान काजू की प्रविष्टि H005 से लेकर पूर्णांकित किए गए हैं। 30 ग्राम के आँकड़े भी उसी प्रविष्टि से गणना करके निकाले गए हैं। ऊर्जा को किलोजूल से किलो कैलोरी में बदला गया है। उपलब्ध कार्बोहाइड्रेट में आहारीय रेशा शामिल नहीं है।
30 ग्राम की मात्रा तुलना के लिए है, हर व्यक्ति के लिए तय दैनिक सेवन की सलाह नहीं। अलग-अलग आकार के ग्रेड में समान संख्या के काजू का वजन अलग होता है। प्रति परोस पोषण की गणना करने से पहले काजू तौलें।
कच्चे, भुने और नमकीन काजू में पोषण
नमक मिलाने से सोडियम की मात्रा बढ़ती है। USDA की संदर्भ प्रविष्टियों में प्रति 100 ग्राम सोडियम के ये मान दिए गए हैं:
- कच्चे काजू: 12 मिलीग्राम।
- बिना अतिरिक्त नमक के ड्राई-रोस्टेड काजू: 16 मिलीग्राम।
- नमक मिलाए हुए ड्राई-रोस्टेड काजू: 640 मिलीग्राम।
USDA के ये आँकड़े खास संदर्भ खाद्य पदार्थों के हैं, हर काजू उत्पाद के नहीं। बाज़ार में बिकने वाले उत्पाद में सोडियम उसकी बनाने की विधि पर निर्भर करता है। जो काजू आप खरीदते या परोसते हैं, उसका लेबल पढ़ें।
तेल मिलाने से वसा और कैलोरी बढ़ सकती हैं; मीठी परत चढ़ाने से चीनी बढ़ती है। पानी की मात्रा भी प्रति 100 ग्राम के पोषण आँकड़ों को प्रभावित करती है। कम पानी वाले खाद्य पदार्थ में समान वजन पर सूखा पदार्थ अधिक होता है। संदर्भ खाद्य पदार्थों के बीच का अंतर केवल भूनने के प्रभाव को नहीं मापता।
काजू, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल
काजू पर हुए परीक्षणों में रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के बारे में अलग-अलग नतीजे मिले हैं। 2018 के एक परीक्षण में टाइप 2 मधुमेह वाले 300 भारतीय वयस्कों को 12 सप्ताह तक शामिल किया गया। दोनों समूहों को खानपान की सलाह दी गई और एक समूह ने इसके साथ रोज़ 30 ग्राम काजू भी खाया।
केवल खानपान की सलाह पाने वाले समूह की तुलना में काजू खाने वाले समूह का सिस्टोलिक रक्तचाप अधिक घटा। सिस्टोलिक रक्तचाप, रक्तचाप की रीडिंग में ऊपर वाली संख्या होती है। रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल का एक प्रकार HDL भी काजू वाले समूह में अधिक बढ़ा। वजन और रक्त शर्करा में हुए बदलावों में दोनों समूहों के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।
2019 के एक परीक्षण में 42 वयस्कों ने 4 सप्ताह तक रोज़ 42 ग्राम काजू खाया। दोनों आहारों की कुल कैलोरी बराबर रखने के लिए दूसरे खाद्य पदार्थों की मात्रा कम की गई। परीक्षण में रक्त की वसा, रक्तचाप या रक्त शर्करा में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। इन परिणामों के लिए अध्ययन दोनों आहारों के बीच अंतर स्थापित नहीं कर सका।
इन परीक्षणों में प्रतिभागी, आहार और अध्ययन की अवधि अलग-अलग थे। इन नतीजों से यह साबित नहीं होता कि काजू किसी बीमारी को रोकता है या उसका इलाज करता है।
काजू से एलर्जी और अनजाने में प्रोटीन मिलना
काजू से एलर्जी में गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है। लक्षणों में सूजन, उल्टी और पित्ती शामिल हो सकते हैं। पित्ती में त्वचा पर उभरे हुए, खुजली वाले चकत्ते बनते हैं। साँस लेने में कठिनाई, गले में सूजन या बेहोश होकर गिरने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
खाद्य लेबल में काजू को ट्री नट्स के समूह में रखा जाता है, भले ही उसकी खाने योग्य गिरी एक बीज है। काजू से एलर्जी वाले व्यक्ति को भुने काजू से भी प्रतिक्रिया हो सकती है।
क्रॉस-कॉन्टैक्ट तब होता है जब काजू के प्रोटीन अनजाने में दूसरे भोजन में पहुँच जाते हैं। साझा बर्तनों, सतहों और उत्पादन उपकरणों से प्रोटीन एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में जा सकता है। एक ही तेल में पकाने से काजू का प्रोटीन बाद में पकाए गए भोजन में भी पहुँच सकता है। काजू के टुकड़े न दिखने पर भी भोजन में उसका प्रोटीन मौजूद हो सकता है।
काजू से एलर्जी वाले व्यक्ति के लिए भोजन खरीदते या तैयार करते समय:
- सामग्री की सूची और एलर्जेन संबंधी घोषणा पढ़ें।
- साझा उपकरणों और खाना पकाने के तेल के बारे में पूछें।
- उसी उत्पाद और उसकी उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी एलर्जेन जानकारी माँगें।
- क्रॉस-कॉन्टैक्ट रोकने के अन्य उपायों के साथ अलग बर्तन और डिब्बे इस्तेमाल करें।
केवल अलग उपकरण इस्तेमाल करने से भोजन का सुरक्षित होना साबित नहीं होता। सफाई, भंडारण और कर्मचारियों के काम करने के तरीके भी प्रोटीन को दूसरे भोजन में पहुँचने से रोकने वाले होने चाहिए।
काजू की गुणवत्ता और ताज़गी
रंग, सतह के निशान और बचा हुआ छिलका
गिरी का रंग ग्रेडिंग का हिस्सा है, लेकिन इससे ताज़गी की पुष्टि नहीं होती। पतले भूरे धब्बे छिलका उतारने के बाद बचे टेस्टा के अंश हो सकते हैं। प्रसंस्करण के दौरान रगड़ लगने से भी सतह पर निशान पड़ सकते हैं।
तेल का बासीपन, फफूँद और कीड़ों का नुकसान
गिरी के तेल के खराब होने पर बासीपन विकसित होता है और असामान्य गंध आ सकती है। फफूँद, कीड़े, जाले या कीड़ों के अवशेष वाला खाद्य पदार्थ इस्तेमाल करना बंद करें। प्रभावित पैक अलग रखें और बैच नंबर लिख लें।
काजू सुरक्षित है या नहीं, यह जाँचने के लिए प्रभावित काजू को चखें नहीं।
केवल दिखावट और गंध से हर खतरे को खारिज नहीं किया जा सकता। अफ्लाटॉक्सिन और साल्मोनेला जैसे खतरों की जाँच के लिए प्रयोगशाला परीक्षण चाहिए। बैच नंबर, पैक की जानकारी और तस्वीरों के साथ आपूर्तिकर्ता से संपर्क करें।
फसल वर्ष, प्रसंस्करण की तारीख और पैकिंग की तारीख
फसल वर्ष, कटाई का वर्ष या मौसम बताता है। पैकिंग की तारीख बताती है कि गिरी पैक में कब रखी गई। प्रसंस्करण की तारीख किस चरण से जुड़ी है, यह पूछें।
हाल की पैकिंग तारीख से यह साबित नहीं होता कि फसल भी हाल में काटी गई है। काजू की कटाई कब हुई, इसकी तुलना करने के लिए फसल वर्ष पूछें।
बैच नंबर और प्रयोगशाला परीक्षण
बैच नंबर पैक को उत्पादन और वितरण के रिकॉर्ड से जोड़ता है। पैक का बैच नंबर, परीक्षण रिपोर्ट में दिए गए बैच से मिलाएँ। नमूना लेने की तारीख, किए गए परीक्षण और उनके परिणाम पढ़ें।
प्रयोगशाला परीक्षणों से नमी, तेल में बदलाव और खाद्य सुरक्षा संबंधी खतरों की जाँच होती है:
- नमी की जाँच नमूने में पानी की मात्रा मापती है।
- पेरॉक्साइड वैल्यू की जाँच तेल में शुरुआती ऑक्सीकरण का आकलन करने में मदद करती है। ऑक्सीकरण में ऑक्सीजन की भूमिका होती है और यह तेल के बासीपन का कारण बन सकता है।
- अफ्लाटॉक्सिन की जाँच कुछ प्रकार की फफूँद से बनने वाले विषैले पदार्थों को जाँचती है।
- साल्मोनेला की जाँच ऐसे जीवाणु की जाँच करती है जो दूषित भोजन से बीमारी पैदा कर सकता है।
नमी की मात्रा कम होने पर गिरी आसानी से टूट सकती है। अधिक नमी से गिरियाँ आपस में चिपक सकती हैं। इसलिए कम नमी हमेशा बेहतर होने का संकेत नहीं है।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट भेजे गए नमूने और उसमें बताए गए परीक्षणों तक सीमित होती है। परिणामों की तुलना तय विनिर्देश और लागू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं से करें।
काजू के भाव अलग क्यों होते हैं?
काजू के भाव ग्रेड, प्रसंस्करण और बिक्री की शर्तों पर निर्भर करते हैं। प्रसंस्करण खर्च में श्रम, ऊर्जा, छँटाई और पैकिंग शामिल हैं। भूनने और स्वाद मिलाने से अतिरिक्त प्रसंस्करण खर्च के साथ तेल, नमक या परत चढ़ाने वाली सामग्री का खर्च भी जुड़ता है।
W180 और LWP के भाव अलग तरह की गिरी के लिए होते हैं। टुकड़ों वाले ग्रेड की तुलना साबुत गिरी के ग्रेड से अलग करें। यदि 2 भाव एक ही ग्रेड कोड के लिए हों, तो स्वीकार्य टूट-फूट और रंग के दोषों की तुलना करें।
ऑर्डर की मात्रा, पैक का आकार और डिलीवरी की शर्तें कुल लागत बदल सकती हैं। समान शुद्ध वजन की तुलना करें और देखें कि पैकिंग, मालभाड़े और टैक्स के कौन-से शुल्क शामिल हैं।
काजू की पैकिंग
काजू की पैकिंग नमी के प्रवेश, हवा के संपर्क और उठाने-रखने के दौरान होने वाले नुकसान को सीमित करती है। अंदर का पैक गिरी को बाहर की हवा और नमी से सील करके रखता है। बाहरी कार्टन परिवहन के दौरान अंदर के पैक की रक्षा करता है। माल मिलने पर दोनों जाँचें।
वैक्यूम पैकिंग और गैस भरना
वैक्यूम पैकिंग में सील करने से पहले हवा निकाली जाती है। नाइट्रोजन फ्लशिंग में पैक की अधिकांश हवा की जगह नाइट्रोजन भरी जाती है। गैस से पैक करने की कुछ विधियों में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन का मिश्रण इस्तेमाल होता है।
पैक खुलने या क्षतिग्रस्त होने पर हवा और नमी अंदर जा सकती है। पैकिंग से पहले गिरी की ताज़गी, पैक में बची ऑक्सीजन और भंडारण का तापमान, शेल्फ लाइफ को प्रभावित करते हैं।
परिवहन के लिए पैकिंग
बाहरी कार्टन दबाव और उठाने-रखने से होने वाले नुकसान से बचाता है। कार्टन सही होने पर भी अंदर का पैक फटा हो तो इसकी सूचना दें। छेद, खुली या खराब सील, नमी और दबे हुए कार्टन जाँचें।
उठाते-रखते समय पैक को पानी और नुकीली वस्तुओं से बचाएँ। मूल लेबल लगा रहने दें, ताकि बैच नंबर और तारीखें उपलब्ध रहें।
काजू का भंडारण और शेल्फ लाइफ
काजू कितने समय तक ठीक रहता है, यह गिरी के रूप, तैयारी, पैकिंग और भंडारण की स्थितियों पर निर्भर करता है। काटने और पीसने से गिरी की अधिक सतह हवा के संपर्क में आती है। गर्मी, नमी और हवा का संपर्क शेल्फ लाइफ घटा सकते हैं।
सादी गिरी और पानी वाले पेस्ट की भंडारण आवश्यकताएँ अलग होती हैं। उसी उत्पाद और पैक के लिए दिए गए निर्देश अपनाएँ।
पैक खोलने से पहले और बाद का भंडारण
बंद पैक को गर्मी, नमी, कीटों और तेज़ गंध से बचाएँ। आर्द्रता का अर्थ हवा में मौजूद नमी है। भंडारण स्थान को उत्पाद के लिए बताई गई तापमान और आर्द्रता की सीमाओं में रखें।
पैक खोलने के बाद उसे फिर बंद करें या गिरी को साफ, सूखे डिब्बे में रखें। खाद्य पदार्थ रखने के लिए बना डिब्बा इस्तेमाल करें। साफ और सूखे बर्तन इस्तेमाल करें और हर बार काजू निकालने के बाद डिब्बा बंद करें।
मूल बैच नंबर और तारीख की जानकारी संभालकर रखें। पैक खोलने की तारीख अलग लिखें। अलग-अलग बैचों को अलग डिब्बों में रखने से गिरी को उसके मूल पैक से जोड़कर पहचानना आसान होता है।
फ्रिज और फ्रीज़र में रखना
काजू जैसे मेवों को फ्रिज में रखने से तेल का बासीपन धीमा पड़ सकता है। ऐसा शीत भंडारण इस्तेमाल करें जो बताई गई तापमान सीमा बनाए रखे। लंबे भंडारण के लिए सादी गिरी को तभी फ्रीज़ करें जब उत्पाद के निर्देश और उसकी पैकिंग इसकी अनुमति देते हों।
बताई गई तापमान सीमा का पालन करें और गिरी को सीलबंद रखें। सीलबंद पैक दूसरे खाद्य पदार्थों की नमी और गंध से बचाने में मदद करता है।
गर्म, नम हवा में ठंडी गिरी पर संघनन हो सकता है। संघनन वह पानी है जो ठंडी सतह पर बनता है। सूखी गिरी का ठंडा पैक खोलने से पहले उसे बंद रखते हुए स्वाभाविक रूप से सामान्य तापमान पर आने दें। पैक खोलने के दिए गए निर्देशों का पालन करें।
पैक को गर्म करने के लिए हीटर इस्तेमाल न करें। पानी वाले पेस्ट या पेय को लगातार फ्रिज में रखने की ज़रूरत हो सकती है। पैक खोलने के बाद के निर्देशों सहित पेस्ट या पेय के लेबल का पालन करें।
बेस्ट-बिफोर और एक्सपायरी की तारीखें
बेस्ट-बिफोर तारीख बताई गई भंडारण स्थितियों में गुणवत्ता से जुड़ी होती है। एक्सपायरी या यूज़-बाय तारीख के बाद खाद्य पदार्थ सुरक्षित न रह सकता है। एक्सपायरी या यूज़-बाय तारीख बीतने के बाद खाद्य पदार्थ बेचें या वितरित न करें।
पैक का नुकसान या गलत भंडारण, छपी तारीख से पहले भी भोजन को असुरक्षित बना सकता है। खराब भोजन इस्तेमाल न करें, भले ही छपी तारीख अभी न बीती हो। पैक खोलने के बाद इस्तेमाल की कोई छोटी अवधि दी गई हो, तो उसका पालन करें।
फ्रिज में रखने या दोबारा पैक करने से मूल तारीख अपने आप आगे नहीं बढ़ती। भंडारण के निर्देश पैक के साथ या डिब्बे के लेबल पर रखें।
